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शांति के दावे से ईरान को ‘तबाह’ करने की चेतावनी तक, UN में क्या बोले ट्रंप?

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संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाषण देते अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
UNGA के 81वें सत्र में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान, भारत-पाकिस्तान और वैश्विक संघर्षों पर बात की।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में 22 सितंबर 2026 को दिया गया भाषण अंतरराष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है। 81वें UNGA सत्र में ट्रंप ने एक तरफ अपने प्रशासन को वैश्विक संघर्षों को सुलझाने वाला बताया और कई युद्धों को रोकने का श्रेय लिया, वहीं दूसरी तरफ ईरान को लेकर बेहद कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी और समझौता नहीं होने पर उसके खिलाफ बेहद कठोर कार्रवाई की जा सकती है।

ट्रंप के भाषण में ईरान, भारत-पाकिस्तान, गाजा, यूक्रेन, संयुक्त राष्ट्र, ICC, UNESCO और अमेरिका की वैश्विक भूमिका जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। उनके भाषण को समझने के लिए उनके शांति संबंधी दावों और ईरान पर दिए गए अल्टीमेटम को अलग-अलग देखना जरूरी है।

1. ट्रंप ने 8 संघर्षों को सुलझाने का किया दावा

भाषण में ट्रंप ने दावा किया कि उनके नेतृत्व में अमेरिका ने दुनिया के कई पुराने संघर्षों को खत्म करने या रोकने में भूमिका निभाई है। उन्होंने भारत-पाकिस्तान, कंबोडिया-थाईलैंड, कोसोवो-सर्बिया, कांगो-रवांडा, आर्मेनिया-अजरबैजान और गाजा समेत कई संघर्षों का जिक्र किया। उन्होंने अपनी भूमिका को अमेरिकी शक्ति, व्यापार और टैरिफ जैसे साधनों से जोड़ा।

हालांकि, इन संघर्षों को पूरी तरह अपने प्रयासों से खत्म करने का ट्रंप का दावा एक राजनीतिक दावा है, जिसे प्रत्येक मामले के घटनाक्रम और संबंधित पक्षों के बयानों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

2. भारत-पाकिस्तान का जिक्र, ट्रंप ने फिर दोहराया पुराना दावा

ट्रंप ने एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्षविराम में अपनी भूमिका का दावा किया। उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का जिक्र करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से बड़ी संख्या में लोगों की जान बची।

भारत का आधिकारिक रुख इससे अलग रहा है। भारत सरकार ने कहा था कि सैन्य कार्रवाई रोकने से जुड़ी बातचीत भारत और पाकिस्तान के सैन्य अधिकारियों के बीच मौजूदा संचार माध्यमों से सीधे हुई थी और भारत ने किसी मध्यस्थता को स्वीकार नहीं किया।

यही वजह है कि ट्रंप का UN में भारत-पाकिस्तान को लेकर किया गया दावा भारत के आधिकारिक रुख से अलग दिखाई देता है।

3. ईरान पर ट्रंप का सबसे कड़ा संदेश

भाषण का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा ईरान को लेकर था। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं देगा।

उन्होंने ईरान के सामने समझौते का विकल्प रखा और इसके बाद बेहद कड़े शब्दों में सैन्य कार्रवाई की संभावना की बात की। ट्रंप ने पूछा कि क्या ईरान के साथ ऐसा समझौता होगा जिससे वह आगे बढ़ सके या फिर अमेरिका ईरान को तबाह कर देगा। उन्होंने ‘नर्क में भेजने’ जैसी भाषा का भी इस्तेमाल किया।

ट्रंप ने साथ ही कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के बाद ईरान के साथ समझौता हो सकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह खुद इन चुनावों में उम्मीदवार नहीं हैं, बल्कि रिपब्लिकन पार्टी की मदद करेंगे।

4. शांति और दबाव की नीति साथ-साथ

ट्रंप के भाषण में एक तरफ संघर्षों को रोकने और शांति समझौतों का श्रेय लेने की कोशिश दिखाई दी, जबकि दूसरी तरफ ईरान के खिलाफ सैन्य और आर्थिक दबाव की बात भी सामने आई।

रॉयटर्स के मुताबिक, ट्रंप ने ईरान के खिलाफ आर्थिक अलगाव की अपील की और कहा कि अमेरिका की प्राथमिकता ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है।

इससे उनके भाषण का एक महत्वपूर्ण संदेश सामने आता है—अमेरिका बातचीत के रास्ते को पूरी तरह बंद नहीं कर रहा, लेकिन उसके साथ सैन्य और आर्थिक दबाव को भी नीति के हिस्से के रूप में इस्तेमाल कर रहा है।

5. UN और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं पर भी निशाना

ट्रंप ने अपने भाषण में संयुक्त राष्ट्र की कार्यप्रणाली और कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की आलोचना की। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC), संयुक्त राष्ट्र की कुछ संस्थाओं और UNESCO को लेकर भी सवाल उठाए।

उन्होंने वैश्विक स्तर पर किसी ऐसी व्यवस्था का विरोध किया जिसमें अमेरिका की संप्रभुता और निर्णय लेने की स्वतंत्रता सीमित हो। साथ ही उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के अंतरराष्ट्रीय नियमन का भी विरोध किया और AI को ‘Super Intelligence’ कहने की बात की।

‘Board of Peace’ को लेकर क्या कहा?

ट्रंप ने अपने भाषण में जनवरी में बनाए गए Board of Peace का भी जिक्र किया। उन्होंने इसे वैश्विक शांति और संघर्षों से जुड़े अमेरिकी प्रयासों के संदर्भ में पेश किया। हालांकि, इसे संयुक्त राष्ट्र का आधिकारिक विकल्प मानना अभी सही नहीं होगा। यह ट्रंप प्रशासन की प्रस्तावित/स्थापित पहल है, जबकि UN एक अलग अंतरराष्ट्रीय संस्था है।

आखिर ट्रंप के भाषण का संदेश क्या रहा?

ट्रंप के UNGA भाषण में दो प्रमुख संदेश दिखाई देते हैं। पहला, अमेरिकी राष्ट्रपति अपने प्रशासन की विदेश नीति को अमेरिकी शक्ति और दबाव के जरिए संघर्षों को प्रभावित करने वाली नीति के रूप में पेश कर रहे हैं। दूसरा, ईरान के मामले में उन्होंने बातचीत की संभावना खुली रखते हुए सैन्य कार्रवाई की कड़ी चेतावनी भी दी।

इसलिए भाषण को केवल ‘शांति’ या केवल ‘युद्ध की धमकी’ के रूप में देखना अधूरा होगा। इसमें कूटनीति, आर्थिक दबाव, सैन्य शक्ति और अमेरिका की वैश्विक भूमिका—चारों पहलू एक साथ दिखाई देते हैं।

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