
संयुक्त राष्ट्र महासभा के ‘Correct the Map’ प्रस्ताव को लेकर भारत ने अपना रुख साफ कर दिया है। भारत ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया है, लेकिन विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इसका मतलब किसी खास विश्व मानचित्र, मानचित्र प्रक्षेपण या किसी देश की सीमा के चित्रण का समर्थन करना नहीं है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 6 सितंबर को कहा कि संयुक्त राष्ट्र का प्रस्ताव समान-क्षेत्र वाले मानचित्र प्रक्षेपण को बढ़ावा देने से जुड़ा है। इसका उद्देश्य दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों, खासकर अफ्रीका के क्षेत्रफल को अधिक सही अनुपात में दिखाने को बढ़ावा देना है।
J&K और लद्दाख पर भारत ने साफ कर दिया रुख
भारत ने इस पूरे मामले में अपनी सबसे अहम बात जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को लेकर कही है।
रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि भारत का संप्रभु क्षेत्र, जिसमें जम्मू-कश्मीर और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख शामिल हैं, उन्हें भारत के आधिकारिक नक्शे के अनुसार ही दिखाया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत के क्षेत्र का कोई भी गलत या भ्रामक चित्रण स्वीकार्य नहीं है। भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को लेकर उसका रुख स्पष्ट, लगातार कायम और गैर-परक्राम्य है।
क्या UN ने कोई नया राजनीतिक नक्शा लागू कर दिया है?
यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है।
‘Correct the Map’ प्रस्ताव का उद्देश्य किसी एक राजनीतिक विश्व नक्शे को आधिकारिक बनाना नहीं है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं अपनाया है जो अंतरराष्ट्रीय सीमाओं या विवादित क्षेत्रों की स्थिति बदलता हो।
प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य ऐसे समान-क्षेत्र वाले मानचित्र प्रक्षेपण को बढ़ावा देना है, जिनमें अलग-अलग महाद्वीपों और भू-भागों का वास्तविक क्षेत्रफल अधिक सही अनुपात में दिखाई दे।
भारत ने भी अपने स्पष्टीकरण में कहा है कि उसने किसी खास मानचित्र या प्रक्षेपण का समर्थन नहीं किया है।
164 देशों ने किया प्रस्ताव का समर्थन
संयुक्त राष्ट्र महासभा में ‘Correct the Map: Rebalancing Global Cartographic Representation and Promoting Equitable Representation of the World’s Regions, Particularly Africa’ नाम के प्रस्ताव को 164 देशों ने समर्थन दिया।
अमेरिका ने इसके खिलाफ मतदान किया, जबकि छह देश मतदान से अलग रहे।
प्रस्ताव के पीछे मुख्य विचार यह है कि लंबे समय से इस्तेमाल किए जा रहे कुछ विश्व मानचित्रों में महाद्वीपों के वास्तविक क्षेत्रफल का अनुपात सही तरीके से दिखाई नहीं देता। खास तौर पर अफ्रीका के वास्तविक आकार को लेकर लंबे समय से यह बहस होती रही है।
भारत ने प्रस्ताव के पक्ष में क्यों किया मतदान?
भारत ने समान-क्षेत्र वाले मानचित्रों के मूल सिद्धांत का समर्थन किया है। ऐसे मानचित्रों में अलग-अलग भू-भागों के क्षेत्रफल को उनके वास्तविक अनुपात के करीब दिखाने की कोशिश की जाती है।
हालांकि, भारत ने साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि अलग-अलग जरूरतों के लिए अलग-अलग मानचित्र प्रक्षेपण उपयोगी हो सकते हैं और भारत का मतदान किसी एक विशेष प्रक्षेपण को स्वीकार करने का संकेत नहीं है।
पाकिस्तान के संदर्भ में क्या है भारत का संदेश?
इस मुद्दे पर सोशल मीडिया और राजनीतिक चर्चा में पाकिस्तान का जिक्र हो रहा है, लेकिन आधिकारिक तौर पर भारत का बयान पाकिस्तान को लेकर नहीं बल्कि अपनी क्षेत्रीय अखंडता और आधिकारिक मानचित्र को लेकर है।
भारत ने साफ किया है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का चित्रण भारत के आधिकारिक नक्शे के अनुसार होना चाहिए। इसलिए किसी भी ऐसे मानचित्र को भारत स्वीकार नहीं करेगा जिसे वह अपने क्षेत्र का गलत या भ्रामक चित्रण मानता है।



























