Home India पंजाब चुनाव 2027: जेल में बंद संजीव अरोड़ा को AAP का टिकट,...

पंजाब चुनाव 2027: जेल में बंद संजीव अरोड़ा को AAP का टिकट, इन नेताओं ने जेल से लड़ा और जीता चुनाव

11
0
संजीव अरोड़ा AAP टिकट और जेल से चुनाव जीतने वाले नेता
संजीव अरोड़ा AAP टिकट और जेल से चुनाव जीतने वाले नेता

पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर आम आदमी पार्टी ने 40 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है। इस सूची में जेल में बंद कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा का नाम भी शामिल है। पार्टी ने उन्हें लुधियाना पश्चिम विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया है। देश की राजनीति में यह पहला मौका नहीं है जब किसी नेता ने जेल में रहते हुए चुनाव लड़ा हो। इससे पहले कई बड़े नेता जेल की सलाखों के पीछे रहते हुए चुनाव जीत चुके हैं।

पंजाब की राजनीति में आम आदमी पार्टी के इस फैसले ने एक बार फिर जेल से चुनाव लड़ने वाले नेताओं की चर्चा तेज कर दी है। संजीव अरोड़ा को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मई 2026 में कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया था। फिलहाल वह गुरुग्राम की भोंडसी जेल में बंद हैं।

AAP ने उन्हें चुनावी मैदान में उतारकर साफ कर दिया है कि पार्टी उनकी उम्मीदवारी को लेकर पीछे हटने के मूड में नहीं है। हालांकि, देश के राजनीतिक इतिहास में ऐसे कई उदाहरण मौजूद हैं, जब जेल में बंद नेताओं ने चुनावी मुकाबले में बड़े-बड़े राजनीतिक दिग्गजों को शिकस्त दी।

सिमरनजीत सिंह मान ने 1989 में बनाया था रिकॉर्ड

जेल में रहते हुए चुनाव जीतने वाले नेताओं की बात हो तो शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) के अध्यक्ष सिमरनजीत सिंह मान का नाम प्रमुखता से लिया जाता है।

वर्ष 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार के विरोध में उन्होंने अपनी IPS की नौकरी छोड़ दी थी। इसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। जेल में रहते हुए उन्होंने शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) का गठन किया और 1989 के लोकसभा चुनाव में तरनतारन सीट से चुनाव लड़ा।

इस चुनाव में मान को 5,27,207 वोट मिले, जो कुल मतदान का लगभग 94 प्रतिशत था। उन्होंने करीब साढ़े चार लाख वोटों के अंतर से जीत हासिल की। खास बात यह रही कि जेल में बंद होने के कारण वह खुद मतदाताओं के बीच जाकर प्रचार भी नहीं कर सके थे।

अतिंदरपाल सिंह ने पटियाला से हासिल की थी जीत

1989 के लोकसभा चुनाव में ही पंजाब से जेल में रहकर चुनाव जीतने का एक और उदाहरण सामने आया था। अतिंदरपाल सिंह ने पटियाला लोकसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था।

दिल्ली में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में आरोपी बनाए जाने के बाद वह जेल में थे। उस समय सिमरनजीत सिंह मान ने अपने उम्मीदवार को उनके समर्थन में चुनाव मैदान से हटा लिया था।

अतिंदरपाल सिंह को चुनाव में 2,94,172 वोट मिले। यह कुल मतदान का 46.59 प्रतिशत था। इस तरह उन्होंने भी जेल में रहते हुए लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज की।

जॉर्ज फर्नांडिस की तस्वीर ने बदल दिया था चुनावी माहौल

देश के राजनीतिक इतिहास में वर्ष 1977 का चुनाव भी बेहद खास माना जाता है। आपातकाल के दौरान गिरफ्तार किए गए समाजवादी नेता जॉर्ज फर्नांडिस ने बिहार की मुजफ्फरपुर लोकसभा सीट से जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा था।

उस समय वह तिहाड़ जेल में बंद थे। चुनाव प्रचार के दौरान उनकी हथकड़ी पहने और पीछे जेल की सलाखों वाली तस्वीर खूब चर्चा में रही।

इस चुनाव में मतदाताओं ने उन्हें जबरदस्त समर्थन दिया और उन्होंने करीब 3.34 लाख वोटों के अंतर से जीत हासिल की। बाद में जॉर्ज फर्नांडिस देश के रक्षा मंत्री भी बने।

मुख्तार अंसारी और कल्पनाथ राय का चुनावी मुकाबला

उत्तर प्रदेश में भी जेल में रहते हुए चुनाव लड़ने और जीतने के कई चर्चित उदाहरण रहे हैं।

वर्ष 1996 में मुख्तार अंसारी ने मऊ विधानसभा सीट से बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। उस समय वह जेल में बंद थे।

इसी चुनावी दौर में पूर्व केंद्रीय मंत्री कल्पनाथ राय ने भी घोसी लोकसभा सीट से जेल में रहते हुए चुनाव लड़ा था। वह टाडा मामले में जेल में बंद थे। इस चुनाव में कल्पनाथ राय ने मुख्तार अंसारी को हराया था।

आजम खान और नाहिद हसन ने भी जेल से जीता चुनाव

वर्ष 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान ने जेल में रहते हुए रामपुर विधानसभा सीट से जीत हासिल की थी।

वहीं कैराना विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार नाहिद हसन ने भी जेल में रहते हुए चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की।

हालांकि, बाद में एक मामले में सजा होने के बाद आजम खान को अपनी विधानसभा सदस्यता गंवानी पड़ी।

अमृतपाल सिंह ने 1.97 लाख से ज्यादा वोटों से दर्ज की जीत

जेल में रहते हुए चुनाव जीतने का सबसे हालिया चर्चित उदाहरण वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में देखने को मिला।

पंजाब की खडूर साहिब लोकसभा सीट से वारिस पंजाब दे के प्रमुख अमृतपाल सिंह ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था। वह राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत असम की डिब्रूगढ़ जेल में बंद थे।

इसके बावजूद उन्होंने 1.97 लाख से अधिक वोटों के अंतर से जीत हासिल की।

इसी लोकसभा चुनाव में जम्मू-कश्मीर की बारामुला सीट से इंजीनियर राशिद ने भी जेल में रहते हुए चुनाव जीता। वह आतंकवाद के वित्तपोषण से जुड़े मामले में दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद थे। उन्होंने नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला को हराया था।

दोनों नेताओं को सांसद पद की शपथ लेने के लिए अदालत से अस्थायी रिहाई की अनुमति मिली थी।

क्या जेल में बंद व्यक्ति लड़ सकता है चुनाव?

भारत में चुनाव लड़ने और मतदान करने को लेकर अलग-अलग कानूनी प्रावधान हैं।

जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 62(5) के अनुसार, जेल में बंद या पुलिस की वैध हिरासत में रहने वाला व्यक्ति सामान्य तौर पर मतदान नहीं कर सकता। हालांकि, निवारक हिरासत में रखे गए लोगों को इस नियम से छूट प्राप्त है।

दूसरी तरफ, केवल जेल में बंद होने के आधार पर किसी व्यक्ति को चुनाव लड़ने से अयोग्य नहीं माना जाता। लेकिन यदि उसे ऐसी सजा सुनाई गई है, जिसके कारण कानून के तहत उसकी चुनाव लड़ने की पात्रता समाप्त हो जाती है, तो स्थिति अलग हो सकती है।

संजीव अरोड़ा की उम्मीदवारी से फिर गर्माई सियासत

अब पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 में संजीव अरोड़ा की उम्मीदवारी ने इस पुराने राजनीतिक इतिहास को फिर चर्चा में ला दिया है। सवाल यह है कि क्या जेल में रहते हुए कोई उम्मीदवार एक बार फिर मतदाताओं का भरोसा जीत पाएगा?

इसका जवाब चुनाव परिणाम आने के बाद ही मिलेगा। फिलहाल AAP के इस फैसले ने पंजाब की चुनावी राजनीति में एक नया मुद्दा जरूर खड़ा कर दिया है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here