पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के कार्यालय से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की प्रक्रिया में बदलाव हुआ है। जस्टिस शील नागू ने पंजाब सरकार की उस याचिका की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है, जिसमें हाईकोर्ट के सीबीआई जांच के आदेश को चुनौती दी गई है।
अब भारत के मुख्य न्यायाधीश के निर्देश पर मामले को दूसरी पीठ के सामने रखा जाएगा। इस घटनाक्रम के बाद पंजाब सरकार की याचिका पर आगे की सुनवाई नई बेंच करेगी।
जस्टिस नागू ने क्यों किया खुद को अलग?
मामले की सुनवाई जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ के सामने होनी थी। सुनवाई शुरू होते ही जस्टिस दत्ता ने कहा कि जस्टिस नागू इस मामले को नहीं सुन सकते और इसे मुख्य न्यायाधीश दूसरी पीठ को सौंपेंगे।
पंजाब सरकार के वकील जयदीप गुप्ता ने अदालत को बताया कि जस्टिस नागू ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहते हुए संबंधित जनहित याचिकाकर्ता की कुछ याचिकाओं पर आदेश पारित किए थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार अपनी मौजूदा याचिका में उन आदेशों को आधार नहीं बना रही है।
इसके बावजूद जस्टिस नागू सुनवाई से अलग हुए। अब नई पीठ के गठन और मामले की अगली सुनवाई का फैसला मुख्य न्यायाधीश के निर्देश पर होगा।
हाईकोर्ट ने CBI जांच का आदेश क्यों दिया था?
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 5 अक्टूबर को अधिवक्ता निखिल सराफ की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सीबीआई को आपराधिक मामला दर्ज कर जांच करने का निर्देश दिया था।
याचिका में ED की ओर से भेजी गई जानकारी के आधार पर कथित भ्रष्टाचार की स्वतंत्र जांच की मांग की गई थी। आरोपों में सरकारी अधिकारियों के तबादलों को प्रभावित करने, प्रशासनिक फैसलों में दखल देने और गोपनीय दस्तावेजों तक पहुंच दिलाने जैसी गतिविधियां शामिल हैं।
हाईकोर्ट ने सीबीआई को दो महीने में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था। आरोपों की सत्यता जांच के अधीन है और किसी व्यक्ति की संलिप्तता को सिद्ध तथ्य के रूप में पेश नहीं किया जाना चाहिए।
पंजाब सरकार ने आदेश को चुनौती क्यों दी?
राज्य सरकार ने विशेष अनुमति याचिका के जरिए सुप्रीम कोर्ट से हाईकोर्ट के आदेश पर पुनर्विचार करने की मांग की है। सरकार की दलील है कि ED से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस कार्रवाई के लिए कानूनी शर्तों का पूरा होना जरूरी है।
सरकार ने संबंधित कानूनी प्रावधानों और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला दिया है। उसने मामले को राजनीतिक रूप से प्रेरित भी बताया है। यह राज्य सरकार का पक्ष है; सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर अंतिम फैसला नहीं सुनाया है।
राजबीर सिंह घुम्मन से जुड़े हैं आरोप
मामले में मुख्यमंत्री के विशेष कार्य अधिकारी राजबीर सिंह घुम्मन और कुछ अन्य लोगों से संबंधित आरोपों की जांच की जा रही है। ED की ओर से भेजी गई जानकारी और हाईकोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होगी, यह जांच के निष्कर्षों और अदालतों के आदेशों पर निर्भर करेगा।
अब आगे क्या होगा?
जस्टिस शील नागू के अलग होने के बाद पंजाब सरकार की याचिका नई पीठ के सामने सूचीबद्ध की जानी है। आगे की सुनवाई में अदालत राज्य सरकार की दलीलों, हाईकोर्ट के आदेश और जांच से जुड़े कानूनी पहलुओं पर विचार कर सकती है।
फिलहाल सीबीआई जांच को लेकर पंजाब सरकार की चुनौती पर अंतिम न्यायिक निर्णय आना बाकी है।


























