Home Crime ‘क्या गुरु जी के खिलाफ साजिश थी?’ विज्ञापन पर कोर्ट की नजर,...

‘क्या गुरु जी के खिलाफ साजिश थी?’ विज्ञापन पर कोर्ट की नजर, डेरा सच्चा सौदा समेत 5 पक्षों को नोटिस

7
0
High Court takes suo motu cognizance of Dera Sacha Sauda advertisement
‘क्या गुरु जी के खिलाफ साजिश थी?’ विज्ञापन पर हाई कोर्ट सख्त, डेरा समेत 5 को नोटिस

डेरा सच्चा सौदा से संबंधित एक विज्ञापन अब पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में आपराधिक अवमानना की कार्रवाई का विषय बन गया है। अदालत ने 12 सितंबर 2026 को अखबारों में प्रकाशित विज्ञापन को लेकर स्वत: संज्ञान लिया है।

मामला उस विज्ञापन से जुड़ा है, जिसमें ‘डेरा सच्चा सौदा क्या है? (तथ्य बनाम कल्पना)’ शीर्षक के साथ ‘क्या गुरु जी के खिलाफ साजिश थी?’ सवाल उठाया गया था। विज्ञापन अंग्रेजी और हिंदी समाचार पत्रों के संबंधित संस्करणों के पहले पन्ने पर प्रकाशित हुआ था।

कोर्ट ने सामग्री को प्रथमदृष्टया गंभीर माना

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने विज्ञापन की सामग्री पर टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रथमदृष्टया इसमें न्यायपालिका के खिलाफ ऐसे आरोप या संकेत नजर आते हैं, जिनसे अदालत की प्रतिष्ठा प्रभावित होने, न्यायिक कार्यवाही में हस्तक्षेप या न्याय प्रशासन में बाधा की आशंका हो सकती है।

अदालत ने यह भी कहा कि लंबित अपीलों और मुकदमों के दौरान किसी आरोपी या दोषी के पक्ष में अदालतों को साजिश का हिस्सा बताने वाली सार्वजनिक अपील या भुगतान किए गए नैरेटिव न्यायिक प्रक्रिया पर असर डाल सकते हैं।

16 सितंबर के आदेश में क्या कहा गया?

16 सितंबर को पारित आदेश में हाई कोर्ट ने विज्ञापन की सामग्री को लेकर न्यायिक प्रक्रिया पर संभावित प्रभाव की चिंता जताई। कोर्ट ने माना कि इस तरह की सामग्री जनता की राय को प्रभावित करने और न्यायिक कार्यवाही पर दबाव बनाने की दिशा में जा सकती है।

इसी आधार पर अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 215 और न्यायालय की अवमानना अधिनियम, 1971 की संबंधित धाराओं के तहत स्वत: संज्ञान लेते हुए आपराधिक अवमानना याचिका दर्ज करने का निर्देश दिया।

किन-किन को भेजा जाएगा नोटिस?

हाई कोर्ट ने रजिस्ट्री को 7 अक्टूबर 2026 के लिए पांच संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है।

इनमें डेरा सच्चा सौदा प्रबंधन, एक अंग्रेजी समाचार पत्र के प्रकाशक और एडिटर-इन-चीफ तथा एक हिंदी दैनिक के प्रकाशक और एडिटर-इन-चीफ शामिल हैं।

इसके अलावा चंडीगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को सभी संबंधित पक्षों का विवरण हाई कोर्ट की रजिस्ट्री तक पहुंचाने में सहयोग करने के निर्देश दिए गए हैं।

अब आगे क्या होगा?

अदालत ने कहा है कि विज्ञापन में लगाए गए आरोपों और टिप्पणियों की जांच न्यायालय की अवमानना अधिनियम के तहत की जानी जरूरी है। मामले को आगे नियमित रोस्टर के अनुसार सूचीबद्ध किया जाएगा।

फिलहाल कोर्ट की कार्रवाई विज्ञापन की प्रकाशित सामग्री और उसके न्यायिक प्रक्रिया पर संभावित प्रभाव से जुड़ी है। अदालत ने इस मामले में संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर देने के लिए नोटिस की प्रक्रिया शुरू की है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here