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NEET-UG 2027 में हो सकते हैं बड़े बदलाव, साल में 4 बार परीक्षा और बोर्ड नंबरों की वेटेज पर मंथन

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NEET-UG 2027 में हो सकते हैं बड़े बदलाव, साल में 4 बार परीक्षा और बोर्ड नंबरों की वेटेज पर मंथन
NEET-UG 2027 में हो सकते हैं बड़े बदलाव, साल में 4 बार परीक्षा और बोर्ड नंबरों की वेटेज पर मंथन

देश में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर बड़े सुधारों की तैयारी चल रही है। शिक्षा मंत्रालय में परीक्षा व्यवस्था में बदलाव को लेकर लगातार बैठकें हो रही हैं। वहीं, परीक्षा सुधारों के लिए गठित हाई-पावर्ड टास्क फोर्स को भी अलग-अलग विशेषज्ञों और शिक्षाविदों से सुझाव मिल रहे हैं।

मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG को लेकर भी कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा हो रही है। इनमें परीक्षा को साल में एक से अधिक बार आयोजित करना, बोर्ड परीक्षा के अंकों को कुछ वेटेज देना और परीक्षा के तरीके में बदलाव जैसे सुझाव शामिल हैं।

हालांकि, इन प्रस्तावों को लेकर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

साल में 4 बार NEET कराने का सुझाव

शिक्षाविद और बीजेपी के राज्यसभा सांसद डॉ. अशोक कुमार मित्तल ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा को लेकर एक अहम सुझाव दिया है। उनका कहना है कि छात्रों को करीब एक से डेढ़ साल की अवधि में चार बार एंट्रेंस टेस्ट देने का मौका मिलना चाहिए और इनमें से छात्र के सबसे बेहतर स्कोर को एडमिशन के लिए माना जा सकता है।

डॉ. मित्तल के मुताबिक, इससे छात्रों का मानसिक दबाव कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में कई छात्र लंबे समय तक NEET की तैयारी करते हैं, लेकिन उनका पूरा करियर एक दिन और कुछ घंटों की परीक्षा पर निर्भर हो जाता है।

उनका मानना है कि परीक्षा के ज्यादा अवसर मिलने से किसी एक दिन के प्रदर्शन का दबाव कम होगा।

11वीं से मिलें परीक्षा के मौके

डॉ. मित्तल ने सुझाव दिया कि छात्रों को 11वीं कक्षा के अंत से NEET देने के अवसर मिलने शुरू हो सकते हैं और 12वीं का रिजल्ट आने तक उन्हें कई मौके दिए जा सकते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि अगर परीक्षा कई चरणों में आयोजित की जाती है तो उसकी फीस को कम रखा जाना चाहिए, ताकि अतिरिक्त अवसर छात्रों पर आर्थिक बोझ न डालें।

NEET-UG 2027 में CBT मोड पर जोर

NEET-UG 2027 को लेकर एक बड़ा बदलाव पहले से तय है। परीक्षा को पेन-पेपर मोड से कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) में कराने की दिशा में बदलाव किया जा रहा है।

इसी के साथ अब यह सवाल भी चर्चा में है कि क्या NEET को JEE की तरह साल में एक से ज्यादा बार आयोजित किया जाना चाहिए। अगर ऐसा होता है तो मेडिकल प्रवेश की तैयारी कर रहे छात्रों को परीक्षा में प्रदर्शन सुधारने के लिए अतिरिक्त अवसर मिल सकते हैं।

बोर्ड परीक्षा के नंबरों को भी मिल सकती है वेटेज?

NEET में बदलाव को लेकर एक अन्य महत्वपूर्ण सुझाव बोर्ड परीक्षा के अंकों से जुड़ा है। करियर काउंसलर आलोक बंसल का मानना है कि मेडिकल प्रवेश में सिर्फ एंट्रेंस टेस्ट के स्कोर पर निर्भर रहने के बजाय बोर्ड परीक्षा के प्रदर्शन को भी कुछ महत्व दिया जाना चाहिए।

उनका कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के कारण कई छात्र स्कूल की नियमित पढ़ाई और कक्षाओं से दूर हो रहे हैं। ऐसे में बोर्ड परीक्षा के अंकों को कुछ वेटेज देने से स्कूली शिक्षा पर भी ध्यान बढ़ सकता है।

उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय में पिछले कुछ वर्षों में 12वीं के अंकों के आधार पर दाखिले के उदाहरण का भी उल्लेख किया।

पहले भी कई बार परीक्षा कराने का सुझाव

परीक्षा सुधार को लेकर पहले बनी समिति की चर्चाओं में भी प्रतियोगी परीक्षाओं को साल में एक से ज्यादा बार कराने का सुझाव सामने आया था। JEE की तरह NEET को भी कई अवसरों में आयोजित करने से छात्रों पर एक ही परीक्षा का दबाव कम होने की उम्मीद जताई गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इससे परीक्षा को लेकर तनाव कम हो सकता है और छात्रों की कोचिंग पर निर्भरता भी कुछ हद तक घट सकती है।

कोचिंग संस्थानों को लेकर भी सुधार की जरूरत

परीक्षा व्यवस्था में बदलाव के साथ कोचिंग संस्थानों की भूमिका को लेकर भी सुझाव सामने आए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि स्कूलों को छात्रों की एंट्रेंस परीक्षा की तैयारी के लिए बेहतर अकादमिक प्लानिंग में शामिल किया जाना चाहिए, लेकिन स्कूलों को कोचिंग सेंटर में बदलने से बचना जरूरी है।

इसके अलावा छात्रों को प्रभावित करने वाले भ्रामक विज्ञापनों पर रोक लगाने और कोचिंग संस्थानों द्वारा किए जाने वाले सफलता के दावों की जांच के लिए भी सख्त नियम बनाने की जरूरत बताई गई है।

अभी क्या तय हुआ है?

फिलहाल NEET-UG को साल में चार बार कराने और बोर्ड परीक्षा के नंबरों को वेटेज देने जैसे सुझाव चर्चा और प्रस्ताव के स्तर पर हैं। इन पर अंतिम निर्णय संबंधित सरकारी और नियामकीय संस्थाओं की ओर से लिया जाना बाकी है।

वहीं, NEET-UG 2027 के परीक्षा मोड में बदलाव को लेकर छात्रों को आधिकारिक अधिसूचना और परीक्षा प्राधिकरण की गाइडलाइंस का इंतजार करना चाहिए। किसी भी नए पैटर्न या नियम को अंतिम मानने से पहले आधिकारिक घोषणा की पुष्टि करना जरूरी है।

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