राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने पंजाब के सीमावर्ती, ग्रामीण और दूरदराज के सरकारी स्कूलों में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर ध्वजारोहण और राष्ट्रगान जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों का आयोजन न किए जाने की शिकायतों पर गंभीर संज्ञान लिया है। एनएचआरसी के सदस्यप्रियंक कानूनगो की बेंच ने इस मामले में पंजाब सरकार से एक विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
क्या है पूरा मामला?
एनएचआरसी सदस्य प्रियंक कानूनगो ने सोशल मीडिया और शिकायतों के माध्यम से आरोप लगाया था कि पाकिस्तान सीमा से सटे पंजाब के कुछ गांवों और वहां के सरकारी स्कूलों में 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) के दिन न तो झंडा फहराया गया और न ही राष्ट्रगान गाया गया। आयोग का कहना है कि इस प्रकार की प्रशासनिक लापरवाही या अनदेखी से ग्रामीण और सीमावर्ती क्षेत्रों के बच्चों को राष्ट्रीय उत्सवों से वंचित किया जा रहा है, जो कि संविधान और भारतीय ध्वज संहिता के नियमों के खिलाफ है।
आयोग ने दिए सख्त निर्देशविस्तृत
रिपोर्ट तलब: एनएचआरसी ने पंजाब के मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि वे राज्य के सभी जिलों और स्कूलों का डेटा खंगालकर चार सप्ताह के भीतर एक्शन/कम्प्लायंस रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
जिला और स्कूलवार ब्योरा: रिपोर्ट में यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि राज्य के कितने सरकारी स्कूलों में 15 अगस्त को राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया, कितने स्कूलों में राष्ट्रगान हुआ और छात्रों ने किन-किन गतिविधियों में हिस्सा लिया।
समान अवसरों की समीक्षा: आयोग यह जांच कर रहा है कि क्या भौगोलिक स्थिति के कारण सीमावर्ती इलाकों के बच्चों को शहरी बच्चों की तरह बुनियादी और सांस्कृतिक अधिकार मिलने में कोई असमानता या भेदभाव हुआ है। इसके साथ ही, एनएचआरसी ने इस मामले से जुड़े तथ्यों की जानकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय और गृह मंत्रालय को भी दी है, ताकि आवश्यक और उचित कदम उठाए जा सकें।























