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पंजाब की राजनीति में कैसे हुई ‘बाज’ की एंट्री? हरसिमरत कौर और भगवंत मान आमने-सामने

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Punjab Politics में बाज को लेकर भगवंत मान और हरसिमरत कौर के बीच जुबानी जंग
पंजाब की राजनीति में ‘गुरु के बाज’ को लेकर हरसिमरत कौर बादल और भगवंत मान आमने-सामने।

पंजाब की राजनीति में इन दिनों एक दुर्लभ पक्षी ‘बाज’ चर्चा के केंद्र में है। आमतौर पर धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीक के तौर पर देखा जाने वाला बाज अब शिरोमणि अकाली दल (SAD) और आम आदमी पार्टी (AAP) के बीच राजनीतिक बयानबाजी का नया मुद्दा बन गया है।

इस पूरे विवाद की शुरुआत 13 अगस्त को नांदेड़ में सुखबीर सिंह बादल पर हुए हमले के बाद हुई। हमले के बाद हरसिमरत कौर बादल ने अस्पताल के बाहर बाज दिखाई देने को धार्मिक आस्था से जोड़ते हुए इसे गुरु की ओर से सुखबीर बादल की रक्षा का संकेत बताया। इसके बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपने भाषणों में इस दावे पर तंज कसा।

दिलचस्प बात यह है कि जिस ‘बाज’ को लेकर दोनों नेताओं के बीच बयानबाजी हो रही है, वह पंजाब के लिए सिर्फ एक सामान्य पक्षी नहीं है। Northern Goshawk को पंजाब का राज्य पक्षी माना जाता है और इसका संबंध गुरु गोबिंद सिंह से जुड़ी ऐतिहासिक-सांस्कृतिक मान्यताओं से बताया जाता है।

नांदेड़ हमले के बाद हरसिमरत कौर ने क्या कहा?

13 अगस्त को महाराष्ट्र के नांदेड़ में सुखबीर सिंह बादल पर हमला हुआ था। घटना के बाद उन्हें उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। इस दौरान हरसिमरत कौर बादल ने दावा किया कि उनके बच्चों ने अस्पताल के बाहर आसमान में एक बाज को लगातार चक्कर लगाते हुए देखा।

हरसिमरत कौर ने इसे गुरु की कृपा और सुरक्षा से जोड़ते हुए कहा कि अगर ‘बाजवाला’ उनकी रक्षा के लिए मौजूद है तो उन्हें किसी से डरने की जरूरत नहीं है। उन्होंने अपने राजनीतिक भाषणों में इस घटना का उल्लेख करते हुए आम आदमी पार्टी पर भी निशाना साधा।

भगवंत मान ने हरसिमरत के दावे पर कसा तंज

हरसिमरत कौर के इस दावे के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपने भाषणों में बाज को लेकर अलग ही राजनीतिक व्याख्या पेश की।

मान ने तंज कसते हुए कहा कि अस्पताल के बाहर दिखाई देने वाला पक्षी सुखबीर बादल की रक्षा के लिए नहीं आया था, बल्कि संभव है कि वह अपने अंडों और घोंसले की रक्षा के लिए वहां मंडरा रहा हो।

मान ने यहां तक व्यंग्य किया कि अगर वह पक्षी बाज था भी तो संभव है कि सुखबीर बादल ने उसके अंडों में भी ‘बिजनेस का हिस्सा’ मांग लिया हो। यह टिप्पणी उनके द्वारा बादल परिवार के कारोबारी प्रभाव को लेकर किए जाने वाले पुराने राजनीतिक हमलों से जुड़ी थी।

भगवंत मान ने बेअदबी के मुद्दे का भी किया जिक्र

भगवंत मान ने बाज वाले मुद्दे को 2015 की बेअदबी की घटनाओं से भी जोड़ दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर बादल परिवार को श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी से जुड़े विवादों का सामना करना पड़ा है, तो गुरु उनके बचाव के लिए अपना बाज क्यों भेजेंगे।

यह बयान पंजाब की राजनीति में संवेदनशील धार्मिक और राजनीतिक मुद्दों को एक बार फिर चर्चा में ले आया है।

‘वह बाज था भी या कौआ-चील?’ मान ने उठाया सवाल

भगवंत मान ने बाज की पहचान को लेकर भी सवाल खड़ा किया। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि अस्पताल के बाहर दिखाई देने वाला पक्षी वास्तव में बाज ही था। उनके मुताबिक कुछ लोग उसे कौआ या चील भी बता रहे थे।

मान ने आगे व्यंग्य करते हुए कहा कि अगर वह बाज था भी, तो जरूरी नहीं कि वह बादल परिवार की सुरक्षा के लिए आया हो। संभव है कि किसी मादा पक्षी ने आसपास अंडे दिए हों और वह अपने घोंसले की निगरानी के लिए वहां आया हो।

अब ‘गुरु का बाज’ बन गया चुनावी मुद्दा

इस पूरे घटनाक्रम ने पंजाब की राजनीति में ‘बाज’ को एक नए राजनीतिक प्रतीक में बदल दिया है। एक तरफ हरसिमरत कौर इसे गुरु की कृपा और सुखबीर बादल की सुरक्षा से जोड़ रही हैं, वहीं भगवंत मान उसी घटना का इस्तेमाल अकाली दल और बादल परिवार पर राजनीतिक हमला करने के लिए कर रहे हैं।

आगामी पंजाब विधानसभा चुनावों को देखते हुए धार्मिक प्रतीकों, पंथक राजनीति और राजनीतिक विरासत से जुड़े मुद्दों की अहमियत और बढ़ गई है। ऐसे में ‘बाज’ का मुद्दा आने वाले दिनों में भी राजनीतिक भाषणों में सुनाई दे सकता है।

पंजाब का राज्य पक्षी है Northern Goshawk

‘बाज’ विवाद का एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि Northern Goshawk को पंजाब का राज्य पक्षी घोषित किया गया है। पंजाब सरकार ने इस पक्षी को खोजने के लिए 2018 और फिर 2025 में प्रयास किए थे, लेकिन आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार इसे पंजाब की सीमा में खोजने में सफलता नहीं मिली।

पंजाब में इस पक्षी का महत्व गुरु गोबिंद सिंह से जुड़ी ऐतिहासिक और धार्मिक मान्यताओं के कारण भी है। इसे शक्ति, संप्रभुता और खालसा की निडर भावना के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।

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