
पंजाब में सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लंबित महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) का विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। लंबे समय से बकाया DA-DR के भुगतान को लेकर कर्मचारी संगठन आंदोलन कर रहे हैं। मामला पहले पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट पहुंचा और अब सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
कर्मचारी संगठनों का दावा है कि करीब 3.5 लाख स्थायी कर्मचारी और लगभग 4 लाख पेंशनर्स अपने लंबित DA-DR का इंतजार कर रहे हैं। दूसरी तरफ सरकार आर्थिक स्थिति और कर्मचारियों को पहले से मिल रहे वेतन का हवाला दे रही है।
आइए 5 प्वाइंट में समझते हैं कि आखिर Punjab DA-DR विवाद क्या है और यह इतना बड़ा मुद्दा क्यों बन गया है।
1. आखिर क्या है पंजाब का DA-DR विवाद?
महंगाई बढ़ने के असर को कम करने के लिए सरकारी कर्मचारियों को महंगाई भत्ता यानी DA और पेंशनर्स को महंगाई राहत यानी DR दी जाती है।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि पंजाब के कर्मचारियों को लंबे समय से DA की कई किस्तें नहीं मिली हैं। उनके मुताबिक केंद्र के कर्मचारियों को अधिक DA मिल रहा है, जबकि पंजाब के सामान्य सरकारी कर्मचारियों को कम दर पर DA दिया जा रहा है।
कर्मचारी संगठनों के अनुसार पंजाब के सामान्य कर्मचारियों को 42 प्रतिशत DA मिल रहा है, जबकि राज्य में तैनात कुछ अखिल भारतीय सेवाओं और न्यायिक अधिकारियों को इससे अधिक DA मिल रहा है। इसी अंतर को कर्मचारी संगठन भेदभाव और विसंगति का मुद्दा बता रहे हैं।
उनका दावा है कि जनवरी 2023 के बाद से लंबित किस्तों के कारण बकाया DA बढ़कर 18 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
2. हाईकोर्ट ने क्या आदेश दिया था?
इस विवाद ने उस समय बड़ा कानूनी मोड़ लिया जब कर्मचारियों की ओर से पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई।
8 अप्रैल 2026 को हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने पंजाब सरकार को लंबित DA/DR जारी करने का आदेश दिया था। अदालत ने कर्मचारियों को कुछ अधिकारियों के समान DA देने से जुड़े निर्देश भी दिए थे।
इसके बाद पंजाब सरकार और PSPCL की ओर से इस आदेश को डिवीजन बेंच के सामने चुनौती दी गई। सरकार ने अपनी वित्तीय स्थिति का हवाला दिया, लेकिन अपील को राहत नहीं मिली।
3. अगस्त में फिर आया बड़ा फैसला
3 अगस्त 2026 को चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने सरकार की अपील खारिज कर दी।
अदालत ने लंबित भुगतान को लेकर समयसीमा तय की और अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। आदेश के मुताबिक तय समय में भुगतान नहीं होने की स्थिति में बकाया राशि पर 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज का प्रावधान भी रखा गया।
इस आदेश के बाद कर्मचारियों को उम्मीद थी कि लंबे समय से लंबित DA-DR के भुगतान का रास्ता साफ होगा।
4. डेडलाइन खत्म होने के बाद क्यों बढ़ा विवाद?
हाईकोर्ट की ओर से तय समयसीमा खत्म होने के बाद भी कर्मचारियों को बकाया DA-DR का भुगतान नहीं हुआ। इसके बाद कर्मचारी संगठनों ने सरकार के खिलाफ फिर से कानूनी कदम उठाया।
कर्मचारी पक्ष की ओर से अवमानना याचिका दायर की गई। वहीं, वित्त विभाग की ओर से विभागों को भेजे गए पत्र को लेकर भी कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ी।
मामले की सुनवाई के दौरान सरकार ने अदालत से और समय मांगा। अब इस मामले में अगली सुनवाई की तारीख 27 सितंबर 2026 बताई गई है।
5. क्या फिर हो सकती है कर्मचारियों की हड़ताल?
DA-DR विवाद को लेकर कर्मचारी संगठन लगातार आंदोलन का रास्ता अपना रहे हैं। 27 अगस्त को कर्मचारियों की ओर से महाहड़ताल भी की गई।
इसके बाद कर्मचारी संगठनों ने सरकार को 7 सितंबर तक का समय दिया है। संगठनों का कहना है कि अगर शो-कॉज नोटिस वापस नहीं लिए गए तो 8 सितंबर को मास कैजुअल लीव लेकर विरोध किया जा सकता है। इसके अलावा मंत्रियों के घरों के बाहर प्रदर्शन की भी चेतावनी दी गई है।
दूसरी ओर मुख्यमंत्री की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि बातचीत और हड़ताल एक साथ नहीं चल सकती।
अब मामला सुप्रीम कोर्ट में
पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले को अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। ऐसे में DA-DR विवाद का अगला बड़ा पड़ाव सुप्रीम कोर्ट होगा।
कर्मचारी संगठनों की ओर से पहले से केविएट दाखिल किए जाने के कारण सरकार की याचिका पर सुनवाई के दौरान कर्मचारी पक्ष को भी अपनी बात रखने का अवसर मिल सकता है।
अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और आने वाले आदेश पर हैं। अगर अदालत में कर्मचारियों के पक्ष में फैसला आता है तो पंजाब सरकार पर लंबित DA-DR के भुगतान का बड़ा वित्तीय बोझ पड़ सकता है।
सरकार पर कितना पड़ सकता है आर्थिक बोझ?
कर्मचारी संगठनों के अनुसार लंबित DA और DR का भुगतान करने पर पंजाब सरकार के खजाने पर करीब 25 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
यही आर्थिक दबाव सरकार के लिए इस मामले को बेहद महत्वपूर्ण बनाता है। वहीं कर्मचारियों का तर्क है कि DA और DR उनका अधिकार है और लंबे समय से लंबित राशि का भुगतान किया जाना चाहिए।
फिलहाल पंजाब का DA-DR विवाद सड़क से अदालत और अब हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और कर्मचारी संगठनों के आंदोलन पर सबकी नजर रहेगी।





















