Punjab Politics: पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) और शिरोमणि अकाली दल (SAD) के बीच संभावित गठबंधन को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। अकाली दल के नेताओं के बयानों से जहां दोनों दलों के बीच बातचीत के संकेत मिल रहे हैं, वहीं बीजेपी लगातार किसी भी गठबंधन की संभावना से इनकार कर रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर दोनों पार्टियों के बीच गठबंधन को लेकर पर्दे के पीछे क्या चल रहा है?
अकाली दल के नेताओं ने दिए गठबंधन के संकेत
अकाली दल के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया ने कहा है कि पंजाब की जनता चाहती है कि अकाली दल और बीजेपी मिलकर विधानसभा चुनाव लड़े। उनके इस बयान को दोनों दलों के बीच संभावित गठबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
वहीं, बठिंडा से सांसद हरसिमरत कौर बादल ने भी लुधियाना की एक रैली में गठबंधन की संभावनाओं को लेकर संकेत दिया। उन्होंने कहा कि अगर भगवान की इच्छा रही तो ऐसे गठबंधन होंगे, जिनके जरिए दिल्ली से पंजाब में विकास कार्यों की नींव दोबारा रखी जाएगी।
इन बयानों के बाद पंजाब की राजनीति में BJP और अकाली दल के दोबारा साथ आने की अटकलें और तेज हो गईं।
सुखबीर बादल की PM मोदी से मुलाकात ने बढ़ाया सस्पेंस
गठबंधन की चर्चाओं को उस समय और हवा मिली, जब अकाली दल अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। हालांकि इस मुलाकात के बाद दोनों दलों की ओर से गठबंधन को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
इसके बावजूद राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि दोनों पार्टियों के बीच भविष्य की चुनावी रणनीति को लेकर बातचीत हो सकती है।
BJP ने साफ कहा- अकेले लड़ेंगे चुनाव
अकाली दल के नेताओं के बयानों के उलट बीजेपी का रुख फिलहाल बिल्कुल स्पष्ट दिखाई दे रहा है। 24 अगस्त को बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन महासचिव बीएल संतोष ने पटियाला में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि बीजेपी पंजाब की सभी विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी और किसी के साथ समझौता नहीं करेगी।
इसके बाद पंजाब बीजेपी अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने भी पार्टी के अकेले चुनाव लड़ने की बात दोहराई। लगातार सामने आ रहे इन बयानों से साफ है कि बीजेपी फिलहाल गठबंधन की अटकलों को सार्वजनिक तौर पर कोई जगह नहीं देना चाहती।
क्या BJP अब ‘छोटे भाई’ की भूमिका नहीं चाहती?
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक बीजेपी पिछले कुछ वर्षों में पंजाब में अपने संगठन को मजबूत करने पर लगातार काम कर रही है। पार्टी का दावा है कि राज्य के कई ऐसे क्षेत्रों में उसकी पहुंच बढ़ी है, जहां पहले उसका प्रभाव सीमित था।
ऐसे में बीजेपी पहले की तरह अकाली दल के साथ गठबंधन में ‘छोटे भाई’ की भूमिका में रहने के बजाय अधिक सीटों पर चुनाव लड़ना चाह सकती है।
चर्चा है कि अगर दोनों दलों के बीच गठबंधन होता है तो बीजेपी पहले की तुलना में काफी ज्यादा सीटों की मांग कर सकती है।
2017 तक 23 सीटों पर चुनाव लड़ती थी BJP
2017 के विधानसभा चुनाव तक BJP और अकाली दल गठबंधन में चुनाव लड़ते रहे हैं। उस समय 117 सदस्यीय पंजाब विधानसभा में बीजेपी 23 सीटों पर चुनाव लड़ती थी, जबकि बाकी सीटों पर अकाली दल के उम्मीदवार मैदान में उतरते थे।
इस बार राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बीजेपी गठबंधन की स्थिति में कम से कम 45 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है। हालांकि सीटों के बंटवारे को लेकर अभी कोई आधिकारिक सहमति सामने नहीं आई है।
गठबंधन की जरूरत दोनों पार्टियों को?
पंजाब की मौजूदा राजनीतिक स्थिति को देखते हुए माना जा रहा है कि BJP और अकाली दल दोनों के लिए गठबंधन के अपने-अपने फायदे हो सकते हैं।
बीजेपी ने पंजाब में संगठन का विस्तार जरूर किया है, लेकिन उसके सामने अभी सबसे बड़ी चुनौती यह है कि क्या वह अकेले दम पर राज्य में सरकार बनाने की स्थिति तक पहुंच सकती है।
दूसरी ओर, अकाली दल के लिए भी कुछ विधानसभा क्षेत्रों में बीजेपी के पारंपरिक हिंदू वोट बैंक का समर्थन महत्वपूर्ण हो सकता है। गठबंधन होने की स्थिति में BJP के बड़े नेताओं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत अन्य नेताओं के प्रचार से अकाली दल को भी चुनावी फायदा मिलने की उम्मीद की जा सकती है।
कांग्रेस ने गठबंधन की अटकलों पर कसा तंज
BJP और अकाली दल के बीच चल रही इस खींचतान पर कांग्रेस भी लगातार निशाना साध रही है।
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने कहा कि दोनों दलों के नेताओं को कभी गठबंधन करने का मन होता है और कभी नहीं। उन्होंने दावा किया कि दोनों पार्टियों को पता है कि बीजेपी के वोटर अकाली दल को और अकाली दल के वोटर बीजेपी को वोट देंगे या नहीं, इसे लेकर भी सवाल बना हुआ है।
क्या चुनाव से पहले बदल सकता है BJP का रुख?
फिलहाल बीजेपी सार्वजनिक तौर पर अकेले चुनाव लड़ने की बात कर रही है, जबकि अकाली दल के नेताओं के बयानों से गठबंधन की उम्मीद बनी हुई है। ऐसे में आने वाले दिनों में दोनों दलों के बीच सीट बंटवारे और चुनावी रणनीति को लेकर तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।
पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले अगर BJP और अकाली दल एक बार फिर साथ आते हैं, तो इसका राज्य की चुनावी राजनीति और वोटों के समीकरण पर बड़ा असर पड़ सकता है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या BJP सच में अकेले चुनाव लड़ेगी या चुनाव से पहले दोनों दल फिर से एक मंच पर नजर आएंगे?






















